जानते हैं भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा 

जानते हैं भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा 

जानते हैं भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा 
जानते हैं भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा 

मनोरंजन : सनातन धर्म में बुधवार का दिन देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को समर्पित है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस दिन गणेशजी के निमित्त व्रत और पूजा करने से भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं एवं गणेश जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

श्री गणेशजी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। बुधवार के दिन भगवान गणेशजी को दूर्वा अर्पित करने से वे बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा अधूरी मानी जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी बीमारी, दरिद्रता या किसी और संकट से जूझ रहा है, तो सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करके दूर्वा अर्पित करने से उसे इन सभी समस्याओं से जल्दी ही छुटकारा मिल जाता है।

बुधवार के दिन गणेश मंदिर में दूर्वा की ग्यारह गांठें चढ़ाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और बुध दोष समाप्त हो जाते हैं। लेकिन आपके मन में सवाल उठता होगा कि आखिर गणेशजी दूर्वा से इतने प्रसन्न क्यों होते हैं ? तो आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे पौराणिक कथा-

शास्त्रों में वर्णित एक पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। उसके उत्पात से धरती और स्वर्ग पर त्राहि-त्राहि मची हुई थी। अनलासुर एक ऐसा दैत्य था, जो मुनि-ऋषियों और साधारण मनुष्यों को जीवित ही निगल जाता था।

इस दैत्य के अत्याचारों से त्रस्त होकर इंद्र सहित सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनि भगवान शिव से विनती करने पहुंचे। उन्होंने प्रार्थना की, कि किसी भी तरह से अनलासुर के आतंक को समाप्त करें। तब भगवान भोलेनाथ ने समस्त देवी-देवताओं और मुनि-ऋषियों की प्रार्थना सुनकर उनसे कहा कि दैत्य अनलासुर का नाश केवल श्री गणेश ही कर सकते हैं।

फिर सभी देवों की प्रार्थना पर गणेश जी ने अनलासुर को निगल लिया, तब उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। इस परेशानी से निपटने के लिए कई प्रकार के उपाय किए गए लेकिन उपाय कारगर नहीं हुआ। उसी समय कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर श्रीगणेशजी को खाने को दीं।

जैसे ही गणेशजी ने दूर्वा को ग्रहण किया,वैसे ही उनके पेट की जलन शांत हो गई।मान्यता है कि उसी समय से गणेश जी पर दूर्वा चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

गणेश पुराण की एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार एक चांडाली और एक गधा गणेश मंदिर में जाते हैं और वह कुछ ऐसा करते हैं कि उनके हाथों से दूर्वा घास गणेशजी के ऊपर गिर जाती है। गणपति जी इससे काफी प्रसन्न हुए और दोनों को ही अपने लोक में स्थान दिया।