बेखौफ माफिया दिखा रहे आंख, नहीं रूका खनन कार्य 

बेखौफ माफिया दिखा रहे आंख, नहीं रूका खनन कार्य 

बेहट : फैजाबाद में स्वीकृत निजी खनन पट्टे में नियमों की अनदेखी और अवैध खनन की शिकायत शासन से किए जाने के बाद भी खोदाई कार्य जारी है।

तहसीलदार जांच के लिए भी गए थे। उन्होंने खोदाई बंद करने के लिए कहा था, लेकिन हथनीकुंड बैराज व पुरातत्व विभाग की संपत्ति के लिए खतरा बने इस पट्टे पर खनन कार्य बंद नहीं किया गया।

यहां बता दें, कि इस पट्टे पर खनन कार्य करा रहे स्टोन क्रशर मालिक तहसीलदार से एक वीडियो में कह रहे है, कि एडीएम से बात करके खोदाई कराई जा रही है।

तहसीलदार जवाब दे रहे है, कि एडीएम से वें भी मिले थे, उन्होंने तो कुछ नहीं कहा। इस बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। 

इस पट्टे की स्वीकृति में एनजीटी और पुरातत्व विभाग की गाइड लाइन का पालन तो किया ही नहीं गया, साथ सिंचाई विभाग से भी अनुमति नहीं ली गई।

तहसील से गई रिपोर्ट भी एनजीटी के आदेशों और खनन नियमावली के विपरीत है। पुरातत्व विभाग व सिंचाई विभाग की अनुमति भी इस पट्टे की स्वीकृति के लिए जरूरी नहीं समझी गई, केवल माफिया का हित किया गया।

इतना ही पट्टे पर अवैध खनन भी किया गया। तहसीलदार के पहुंचने से पहले ही पट्टे पर खोदाई कर किए गए गहरे गड्ढों को भर दिया गया था। तहसीलदार जांच पड़ताल जैसे ही वापस हुए फिर से बड़ी-बड़ी मशीनें खोदाई में लगा दी गई।

कुल मिलाकर माफिया प्रशासन को आंखें दिखाकर अपनी मनमानी कर रहे है। हालांकि तहसीलदार प्रकाश सिंह अवैध खनन होने से इंकार कर रहे है। उनका कहना है, कि रही बात शिकायत की, तो शिकायतकर्ता को शिकायत से संबंधित सभी अभिलेखों के साथ खनन विभाग के ऑफिस जाने के लिए कहा गया है। 

इन नियमों की गई अनदेखी 

1.पट्टे की स्वीकृति में पुरातत्व विभाग के जनरल डायरेक्टर से अनुमति नहीं ली गई। 

2. खनन कार्य क्षेत्र की दूरी पूर्वी यमुना नहर से बहुत कम है। शिकायतकर्ता के अनुसार मुश्किल से 100 से 150 मीटर की दूरी पर खोदाई की जा रही है। इसके लिए सिंचाई विभाग से भी एनओसी लेनी थी। 

3. हथनीकुंड बैराज से खनन क्षेत्र की दूरी नियमानुसार दो किमी से अधिक होनी चाहिए थी, लेकिन खसरा नंबर 43 (ख) से बैराज की दूरी मात्र 698 मीटर है। एनजीटी कोर्ट ने भी बैराज की अपस्ट्रीम में खनन कार्य पर रोक लगाई है। 

रिपोर्ट : सोनु राणा